होली के आड़ में गंदी सोच क्यों सामने आती है? मर्यादा और सुरक्षा पर बड़ा सवाल🧐
होली के आड़ में गंदी सोच क्यों सामने आती है? होली एक पवित्र और खुशियों से भरा त्योहार है। यह रंगों, प्रेम और मेल-मिलाप का प्रतीक है। लेकिन दुख की बात यह है कि कुछ लोग इस त्योहार की आड़ में अपनी गंदी सोच को बाहर ले आते हैं। वे भूल जाते हैं कि त्योहार मर्यादा तोड़ने का नहीं, बल्कि रिश्ते जोड़ने का माध्यम है। ❓ लोग मर्यादा क्यों भूल जाते हैं? भीड़ की मानसिकता (Mob Mentality) जब लोग भीड़ में होते हैं, तो उन्हें लगता है कि उनकी पहचान छिप जाएगी। वे सोचते हैं – “सब कर रहे हैं, तो मैं भी कर लूँ।” “बुरा ना मानो होली है” की गलत व्याख्या यह वाक्य मज़ाक के लिए था, लेकिन कुछ लोग इसे छूट समझ लेते हैं। नशा और नियंत्रण की कमी शराब या नशा इंसान की समझ और सीमाओं को कमजोर कर देता है। अंदर की सोच का बाहर आना सच यह है — त्योहार किसी को खराब नहीं बनाते। वे केवल उस सोच को उजागर करते हैं जो पहले से मौजूद होती है। 🚨 सबसे जरूरी — बहन बेटियों की सुरक्षा और मर्यादा होली तभी सच्ची होगी जब: ✔️ कोई लड़की घर से निकलने में डर महसूस न करे ✔️ किसी को जबरदस्ती रंग न लगाया जाए ✔️ किसी की अनुमति के बिना छुआ न जाए ✔️ ...