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उगते सूरज को सलाम और डूबते सूरज की सच्चाई | इंसान की सोच पर गहरा विचार

 शीर्षक: उगते सूरज को सलाम, डूबते सूरज से बेगानापन — यही समाज की सच्चाई उगते हुए सूरज को देखकर लोग हाथ जोड़ते हैं। उसकी रोशनी को उम्मीद मानते हैं, उससे दुआएँ माँगते हैं और अपने सपनों की शुरुआत उसी के साथ जोड़ देते हैं। सुबह की किरणें जैसे ही धरती को छूती हैं, लोगों के चेहरे पर उम्मीद की चमक आ जाती है। उन्हें लगता है कि उजाला ही शक्ति है, उजाला ही सफलता है। लेकिन वही लोग जब शाम को उसी सूरज को डूबते हुए देखते हैं, तो कोई हाथ नहीं जोड़ता। न कोई उससे मनौती माँगता है, न उसे प्रणाम करता है। मानो डूबता हुआ सूरज उनके लिए बेकार हो गया हो। लोग भूल जाते हैं कि वही सूरज जो अभी डूब रहा है, वही कल फिर से उगकर इस दुनिया को रोशनी देगा। यह सिर्फ प्रकृति का दृश्य नहीं है, बल्कि इंसानी सोच का आईना भी है। समाज भी ठीक ऐसा ही व्यवहार करता है। जब कोई इंसान सफलता की ऊँचाइयों पर होता है, तब हर कोई उसके साथ खड़ा दिखता है। लोग उसकी तारीफ करते हैं, उसके साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं और उसके नाम से खुद को जोड़ना चाहते हैं। लेकिन जैसे ही वही इंसान किसी मुश्किल दौर से गुजरता है, वही लोग उससे दूरी बना लेते हैं। डूबते...