बच्चों की बिगड़ती सोच और समाज का भविष्य | Parents और Society की जिम्मेदारी
बदलती सोच, बढ़ती चिंता: बच्चों की मानसिकता और समाज की जिम्मेदारी जब हम समाज में होने वाली कुछ घटनाओं के बारे में सुनते हैं, तो मन बहुत भारी हो जाता है। ऐसा लगता है जैसे हम उसी समाज का हिस्सा हैं जहाँ कुछ लोगों के मन में इतनी गंदी और खतरनाक सोच जन्म ले रही है। खासकर तब जब ऐसी मानसिकता कम उम्र के बच्चों में दिखाई देने लगे, तो चिंता और भी बढ़ जाती है। बचपन वह समय होता है जब इंसान सीखता है, समझता है और अपने जीवन की नींव बनाता है। अगर उसी उम्र में बच्चों के मन में गलत विचार, गलत आदतें और गलत व्यवहार आने लगें, तो भविष्य के बारे में सवाल उठना स्वाभाविक है। क्योंकि आज का बच्चा ही कल का युवा बनेगा, और वही युवा आगे चलकर समाज और देश को दिशा देगा। समाज की चिंता क्यों बढ़ रही है आजकल कई बार ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं जहाँ कम उम्र के बच्चे ऐसे काम कर बैठते हैं जिन्हें सुनकर विश्वास करना मुश्किल हो जाता है। यह देखकर लोगों के मन में डर पैदा होता है कि अगर नाबालिग उम्र में ही यह स्थिति है, तो जब यही बच्चे बड़े होंगे, तब समाज की हालत क्या होगी। कहा जाता है कि “बूँद-बूँद से सागर बनता है।” ठीक उसी तरह ...