समाज की मरम्मत क्यों जरूरी है? एक गहरी सच्चाई
जैसे दीवारों पर काई लग जाती है, वैसे ही समाज को भी समय-समय पर मरम्मत की जरूरत होती है कभी आपने पुराने घरों की दीवारों को ध्यान से देखा होगा। शुरुआत में दीवारें मजबूत होती हैं, उन पर नया रंग होता है और सब कुछ साफ-सुथरा दिखाई देता है। लेकिन समय के साथ-साथ उन दीवारों पर धीरे-धीरे काई जमने लगती है। पहले वह बहुत हल्की दिखाई देती है। लोग अक्सर उसे नजरअंदाज कर देते हैं। उन्हें लगता है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन धीरे-धीरे वही काई दीवारों को कमजोर करने लगती है। दीवार की चमक खत्म होने लगती है, नमी बढ़ने लगती है और अगर समय रहते उसकी सफाई या मरम्मत न की जाए, तो एक दिन वही दीवार टूटने की स्थिति में भी पहुंच सकती है। यही बात समाज और देश पर भी लागू होती है। समाज भी एक इमारत की तरह होता है एक देश केवल जमीन का टुकड़ा नहीं होता। वह एक विचार होता है, एक व्यवस्था होती है, और सबसे महत्वपूर्ण — वह लोगों का समूह होता है। जैसे एक घर कई ईंटों से बनता है, वैसे ही एक देश करोड़ों लोगों से बनता है। अगर हर ईंट मजबूत हो तो इमारत मजबूत होती है। लेकिन अगर ईंटें कमजोर होने लगें, तो पूरी इमारत खतरे में पड़...