घर में मानसिक प्रताड़ना: जब अपने ही तोड़ने लगें इंसान को
शीर्षक: सबसे ज़्यादा दर्द वहीं मिलता है, जहाँ सबसे ज़्यादा अपनापन होना चाहिए कहते हैं घर वो जगह होती है जहाँ इंसान सबसे सुरक्षित महसूस करता है। लेकिन हर किसी के लिए यह सच नहीं होता। कई लोग ऐसे होते हैं जो बाहर की दुनिया से नहीं, बल्कि अपने ही घर के अंदर से टूटते हैं। मेंटल टॉर्चर हमेशा दिखाई नहीं देता। इसमें कोई चोट नहीं होती, कोई खून नहीं बहता—लेकिन अंदर ही अंदर इंसान पूरी तरह टूट जाता है। ताने, अपमान, बार-बार नीचा दिखाना, चुप कराना, समझने की कोशिश न करना—ये सब धीरे-धीरे किसी की आत्मा को थका देते हैं। सबसे ज्यादा दर्द तब होता है जब यह सब अपने ही लोगों से मिलता है। वही लोग जिनसे प्यार, समझ और सहारे की उम्मीद होती है, वही अगर आपको बार-बार यह महसूस कराएं कि आप गलत हैं, आप कम हैं, या आपकी कोई कीमत नहीं है—तो इंसान खुद पर शक करने लगता है। घर के अंदर होने वाला मानसिक अत्याचार अक्सर लोग समझ ही नहीं पाते। क्योंकि बाहर से सब “नॉर्मल” दिखता है। लोग कहते हैं—“तुम्हारे पास सब कुछ तो है, फिर समस्या क्या है?” लेकिन कोई यह नहीं देखता कि अंदर क्या चल रहा है। धीरे-धीरे इंसान बोलना बंद कर देता है।...