पति ने पत्नी को सरेआम अपमानित किया: क्या ऐसे समाज में महिलाओं की इज्जत सुरक्षित है?”
जब पति ही पत्नी की इज्जत को सरेआम कुचल दे — क्या ऐसे समाज में बदलाव संभव है? समाज अक्सर एक वाक्य बार-बार दोहराता है — “पति को भगवान माना जाता है।” बचपन से ही लड़कियों को सिखाया जाता है कि पति का सम्मान करना चाहिए, उसकी सेवा करनी चाहिए, और शादी के बाद उसका घर ही उसका संसार होता है। लेकिन जब वही पति, जिसे भगवान का दर्जा दिया जाता है, अपनी ही पत्नी की इज्जत को सरेआम कुचल दे, उसे अपमानित करे, उसे इंसान समझने की बजाय एक वस्तु की तरह व्यवहार करे — तब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या सच में यह रिश्ता सम्मान का है, या सिर्फ एक सामाजिक भ्रम? हाल ही में सामने आई घटनाएँ यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि समाज में महिलाओं की स्थिति को लेकर हमारी सोच कितनी विरोधाभासी है। विवाह — सम्मान का रिश्ता या अधिकार का भ्रम? विवाह को हमारे समाज में एक पवित्र रिश्ता माना जाता है। यह दो लोगों के बीच भरोसे, सम्मान और साथ का बंधन होता है। लेकिन कई बार यही रिश्ता शक्ति और अधिकार का रूप ले लेता है। कुछ पुरुष यह मान बैठते हैं कि पत्नी पर उनका पूरा अधिकार है — उसके शरीर पर, उसकी इज्जत पर, उसकी आज़ादी पर। यही सोच कई ...