आज इंसान से नहीं डर लगता… इंसान के अंदर छिपे स्वार्थ से डर लगता है।
🔥 शीर्षक: “जब इंसानियत मर जाती है… इंसान ही इंसान का दुश्मन बन जाता है” इंसानियत मर चुकी है… और सबसे बड़ा सच ये है कि अब इंसान ही इंसान का दुश्मन बनकर बैठा है। पहले कहा जाता था—“इंसान इंसान के काम आता है” आज हकीकत ये है— इंसान इंसान का इस्तेमाल करता है। रिश्ते अब दिल से नहीं जुड़ते… फायदे से जुड़ते हैं। जहाँ फायदा दिखता है, वहाँ अपनापन दिखता है… और जहाँ फायदा खत्म, वहाँ पहचान भी खत्म। यही आज के समाज का असली चेहरा है। एक समय था जब लोग एक-दूसरे के दुख में खड़े होते थे, आज लोग किसी के गिरने का इंतज़ार करते हैं… ताकि वो आगे बढ़ सकें। एकता… जो कभी समाज की ताकत हुआ करती थी, आज वो कहीं खो गई है। अब हर इंसान अकेला है, और हर कोई सिर्फ अपने बारे में सोच रहा है। लालच ने इंसानियत की जगह ले ली है। आज का इंसान यह नहीं सोचता कि उसके काम से किसी को दर्द होगा या नहीं… वो सिर्फ यह सोचता है— “मुझे क्या मिलेगा?” यही सोच सबसे बड़ा ज़हर बन चुकी है। दोस्ती हो या रिश्ते, हर जगह एक ही सवाल है— “इससे मुझे क्या फायदा?” और अगर जवाब “कुछ नहीं” हो… तो रिश्ता भी “कुछ नहीं” बन जाता है। इंसान अब दिल से नहीं… दिम...