शहीदों ने आज़ादी दिलाई थी… हमने इंसानियत को मार दिया | 23 मार्च का कड़वा सच”
🔥 शीर्षक: “शहीदों ने देश आज़ाद किया था… हमने इंसानियत को मार दिया” 23 मार्च… यह सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक ऐसा आईना है जिसमें हम अपनी असली सूरत देख सकते हैं—अगर देखने की हिम्मत हो तो। उस दिन Bhagat Singh, Rajguru और Sukhdev हँसते-हँसते फाँसी पर चढ़ गए थे। उनके पैरों के नीचे ज़मीन खिसक रही थी, लेकिन उनके इरादे अडिग थे। गले में फंदा था… पर दिल में डर नहीं, एक सपना था—एक ऐसा भारत जहाँ इंसानियत जिंदा रहे, जहाँ सम्मान डर से बड़ा हो, जहाँ औरत, बच्चा, बूढ़ा… हर कोई सुरक्षित हो। लेकिन आज… वो सपना कहीं खो गया है। और सच्चाई यह है कि वो सपना किसी और ने नहीं, हमने खुद मिलकर तोड़ा है। आज इस देश में दुश्मन सरहद के उस पार नहीं है… दुश्मन हमारे बीच है—हमारे अंदर है। वो चेहरा बदलकर आता है—कभी दोस्त बनकर, कभी रिश्तेदार बनकर, कभी समाज का सभ्य हिस्सा बनकर। और यही सबसे डरावनी बात है। हम शहीदों की तस्वीरों पर फूल चढ़ाते हैं… उनके नाम पर भाषण देते हैं… लेकिन उसी देश में एक बेटी को रात में बाहर निकलने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है। ये कैसी आज़ादी है…? ये कैसा सम्मान है…? आज हालात ऐसे हैं कि— 👉 मासूम...