कपड़े नहीं बदलेंगे समाज, सोच बदलेगी—तभी अपराध रुकेंगे।”
अपराध की जड़: कपड़े नहीं, सोच है हर बार जब कोई भयानक घटना सामने आती है— rape, kidnapping या किसी लड़की के साथ हिंसा— तो सबसे पहले सवाल उठता है: “उसने क्या पहना था?” “कहाँ गई थी?” “क्यों गई थी?” लेकिन कभी ये सवाल नहीं उठता— “उसने ऐसा किया क्यों?” क्या सच में कपड़े किसी अपराध की वजह बन सकते हैं? अगर ऐसा होता, तो छोटे बच्चों के साथ होने वाले अपराध कैसे समझाए जाते? जहाँ ना कपड़े मायने रखते हैं, ना जगह। सच तो ये है— समस्या कपड़ों में नहीं, सोच में है। Bollywood, songs या social media किसी हद तक असर डाल सकते हैं— लेकिन वो किसी को अपराधी नहीं बनाते। अपराधी बनाता है— एक गंदी मानसिकता, जहाँ लड़की को इंसान नहीं, बल्कि एक “चीज़” समझा जाता है। जब तक समाज में “लड़की की गलती” ढूंढने की आदत रहेगी, तब तक असली गुनहगार हर बार बचता रहेगा। हमें कपड़े बदलने की नहीं, नज़र बदलने की जरूरत है। हमें सवाल लड़की से नहीं, अपराधी से पूछने की जरूरत है। ज़रूरत है सख्त कानून की, तेज़ न्याय की, और सबसे ज्यादा— बचपन से सही सोच की। लड़कों को ये सिखाना होगा कि— सम्मान क्या होता है, सीमा क्या होती है, और “ना” का मतलब ...